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VOL. 2, ISSUE 4 (2017)
सूर एवं तुलसी काव्य का विवेचनात्मक अध्ययन
Authors
डाॅ. पूनम काजल
Abstract
भक्तिकालीन साहित्य में तुलसीदास एवं सूरदास ऐसी महान् विभूतियाँ हैं, जिन्होंने अपने साहित्य द्वारा तत्कालीन हृासोन्मुख समाज का मार्गदर्शन किया। एक ओर जहाँ तुलसीदास ‘रामचरितमानस’ जैसे श्रेष्ठतम महाकाव्य की रचना कर जीवन के विविध पक्षों को पाठकों के समक्ष जीवन्त कर देते हैं, वही सूरदास अपने अनूठे वात्सल्य-चित्रण एवं कृष्ण की लोकरंजनकारी लीलाओं द्वारा पाठक के मन को माधुर्य भाव से ओत-प्रोत कर देते हैं।
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Pages:97-98
How to cite this article:
डाॅ. पूनम काजल "सूर एवं तुलसी काव्य का विवेचनात्मक अध्ययन". International Journal of Academic Research and Development, Vol 2, Issue 4, 2017, Pages 97-98
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